Site icon Socialblize

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:घर में रसोईघर और पूजाघर के महत्व को भी समझा जाए

मुझे अनेक घरों में जाने का अवसर मिलता है। लोग प्रेम से, सम्मान से घर दिखाते हैं। कुछ अवसरों पर मैं जेन-जी के शानदार फ्लैटों में भी जाता हूं। यहां मैं उनकी निंदा नहीं कर रहा, लेकिन जेन-जी को भी अन्य पीढ़ियों की तरह शांति की तलाश है। घर वो अजीब ढंग से सजाते हैं। लेकिन उनके घरों में मंदिर और रसोईघर या तो होते नहीं और जो होते हैं वो वैसे नहीं होते, जैसे होने चाहिए। जबकि जीवन में जिस शांति की तलाश इस युवा पीढ़ी को है, उसका उद्गम घर में भी इन दो घरों में है। इस समय सबके जीवन में अतिमानवी बुद्धिमत्ता से मुकाबले का दौर चल रहा है। एक कृत्रिम जीवन-रचना आसपास बस गई है। हमारे विरुद्ध एक जैविक युद्ध चल रहा है। उसका परिणाम कोरोना के रूप में हम देख चुके हैं। ऐसे में किसी भी निवास स्थान में ये जो दो घर हैं, रसोई घर और पूजा घर, इनके महत्त्व को समझा जाए। जब भी हम इनमें जाएं, पूरी तरह से स्वीकृति अपने भीतर उतारें। यहां विचार शून्य हो जाएं तो मंत्र और अन्न जीवन में पॉजिटिविटी उतार देंगे।

Exit mobile version