Site icon Socialblize

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:जीवन को सिद्धांतों से जोड़ें तो हर गतिविधि परिपक्व होगी

हमारी गतिविधियों में ज्यादातर मौकों पर सूझ, बूझ और बोध का अभाव होता है। यह परिश्रम तो हो सकता है, लेकिन पुरुषार्थ नहीं है। यदि अपने कर्म को पुरुषार्थ बनाना है तो सूझ, जिसका संबंध बुद्धि से है; बूझ, जिसका संबंध बुद्धि और समझ दोनों से है और बोध, यानी अनुभूति और आत्मा- ये तीनों बातें भले ही दिखें ना, पर पूरे जीवन की चाल ठीक कर देंगी। फौज में परेड का बड़ा महत्व है और फौजियों को सिखाया जाता है कि सुबह उठो तो बिस्तर पर एक भी सिलवट नहीं होनी चाहिए। ये दोनों गतिविधियां हमारे चलने और सोकर उठने पर नैतिक नियंत्रण पैदा करती हैं। जीवन को छोटे-छोटे सिद्धांतों से जोड़ें तो हर गतिविधि परिपक्व होगी। बिना पुरुषार्थ के परिश्रम का परिणाम देखने में आ रहा है। पेपर और पेटी, दोनों लीक हो गए। शिक्षा जगत और धर्म जगत में आहत-भरा आक्रोश है। आत्मा पर टिककर कम से कम इतना संकल्प लिया जाए कि हम ऐसे अपराधों में लिप्त नहीं होंगे और प्रयास करेंगे कि हमारा परिश्रम पुरुषार्थ में बदलता रहे।

Exit mobile version