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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:प्रकृति का मान करो, भगवान का भी स्वत: सम्मान हो जाएगा

मनुष्य अगर प्रकृति को निर्जीव करके जीवन ढूंढने का प्रयास करेगा तो बड़े विचित्र दृश्य उतर कर आएंगे। यह चौंकाने और चिंतित करने वाली बात है कि बाबा अमरनाथ पांच दिन में ही अंतर्धान हो गए। यह लगातार तीसरा साल है, जब बाबा यह संकेत दे रहे हैं कि प्रकृति का मान करो, नहीं तो मेरे दर्शन ऐसे आधे-अधूरे रह जाएंगे। परमात्मा ने अपने स्वरूप को प्रकृति में रखा है। अब हमें प्रकृति से छेड़छाड़ बंद करनी ही पड़ेगी। आज पंचतत्वों को रौंदा जा रहा है। हर धार्मिक स्थल पर भीड़ की प्रकृति है। लोग अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार धार्मिक स्थलों का प्राकृतिक आनंद समाप्त करने पर तुले हैं। जिन स्थलों पर भक्तों को स्वच्छता रखनी चाहिए, वहां वे स्वच्छंद होते जा रहे हैं। बाबा अमरनाथ का यूं झलक दिखाना हमारे लिए चिंता का विषय है। इसके लिए निजी जाग्रति ही आवश्यक है। भगवान कृष्ण की वाणी को याद रखना होगा, जो उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाते समय कही थी- मैं ही प्रकृति हूं। प्रकृति का मान करो, मेरा सम्मान हो जाएगा।

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