अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार (स्थानीय समयानुसार) को अनमैंड ड्रोन (मानवरहित विमान) और उनके कंपोनेंट्स (पुर्जों) के आयात पर 100% तक का सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने का ऐलान किया है। ट्रम्प प्रशासन ने यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों और मुख्य रूप से चीन के वर्चस्व वाले इस सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लिया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस फैसले से अमरीका में ड्रोन और उनके कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम होगी। ड्रोन के वजन और क्षमता के हिसाब से तय हुआ टैरिफ व्हाइट हाउस के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले ड्रोन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। 100% टैरिफ: 25 किलोग्राम से अधिक वजन वाले या थर्मल इमेजिंग क्षमताओं वाले ड्रोन पर लागू होगा। 25% टैरिफ: जिन ड्रोन का टेक-ऑफ वजन 25 किलोग्राम या उससे कम है, उन पर 25% का सीमा शुल्क लगेगा। लागू होने की समय-सीमा और छूट के नियम नया टैरिफ स्ट्रक्चर अलग-अलग समयावधि में लागू किया जाएगा… 21 दिन बाद: आदेश पर हस्ताक्षर होने के 21 दिनों के भीतर अधिकांश नए टैरिफ प्रभाव में आ जाएंगे। 180 दिन बाद: जो ड्रोन कंपोनेंट्स बहुत अधिक संवेदनशील श्रेणी में नहीं आते हैं, उन पर टैरिफ 180 दिनों के बाद लागू होगा। विशेष छूट: हस्ताक्षर के 20 दिनों के भीतर अमरीकी युद्ध विभाग (Department of War) द्वारा FCC की ‘कवर्ड लिस्ट’ से छूट प्राप्त प्रोडक्ट्स और कंपोनेंट्स पर भी टैरिफ 180 दिनों बाद प्रभावी होगा। ब्रिटेन और यूरोप समेत 7 सहयोगी देशों पर भी टैरिफ वाशिंगटन ने केवल विरोधी देशों ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगी देशों से आने वाले ड्रोन पर भी टैरिफ लागू किया है: 15% टैरिफ: यूरोपीय यूनियन (EU), जापान, लिकटेंस्टीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान से इम्पोर्ट होने वाले ड्रोन और पुर्जों पर 15% सीमा शुल्क लगेगा। 10% टैरिफ: यूनाइटेड किंगडम (UK) से आने वाले ड्रोन पर 10% शुल्क रहेगा, बशर्ते उनके अधिकांश हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी की उत्पत्ति UK या अमरीका में हुई हो। बैकग्राउंड: चीन की ड्रोन कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रम्प प्रशासन चीनी ड्रोन तकनीक पर अपनी कार्रवाई तेज कर रहा है। पिछले साल दिसंबर में फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने चीनी ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध की घोषणा की थी और विरोधी देशों के ड्रोन को वायरलेस कम्युनिकेशंस की मंजूरी देने पर रोक लगा दी थी। वैश्विक बाजार में शेनझेन स्थित कंपनी DJI टेक्नोलॉजीज का दबदबा है, जिसकी पिछले साल तक अमरीकी कॉमर्शियल ड्रोन बाजार में लगभग 70% हिस्सेदारी थी। इसके अलावा, हाल ही में चीन ने भी अमरीकी व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में अमरीका को ड्रोन एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। रूस-यूक्रेन युद्ध और ‘हाइब्रिड वॉर’ से बढ़ी चिंता ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है। दोनों देशों द्वारा इलाके की रक्षा और उस पर कब्जा करने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल ने एक नए ‘हाइब्रिड वॉर’ को जन्म दिया है। ट्रम्प ने अपने आधिकारिक पत्र में अनमैंड एयरक्राफ्ट सिस्टम को अमरीका की “राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी” करार दिया है। एक्सपर्ट्स की राय: कॉमर्शियल मार्केट का ढांचा पूरी तरह बदलेगा अमरीका-चीन टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा के विशेषज्ञ क्रेग सिंगलेटन ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि यह फैसला कॉमर्शियल मार्केट को पूरी तरह से नया आकार देगा। “अमरीकी कॉमर्शियल और सरकारी खरीदारों को तुरंत एक बड़े पूंजीगत बदलाव (Capital-intensive pivot) की जरूरत होगी। उन्हें अब अमरीका या सहयोगी देशों के सप्लायर्स की तरफ रुख करना होगा, भले ही उनके प्रॉडक्ट्स की कीमत ज्यादा क्यों न हो।”— क्रेग सिंगलेटन, टेक कॉम्पिटिशन एक्सपर्ट यह फैसला चीन के ड्रोन बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और ट्रम्प तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली आगामी बैठक से पहले तनाव बढ़ा सकता है। नॉलेज बॉक्स: क्या है अनमैंड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS)? अनमैंड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS) को सामान्य भाषा में ड्रोन कहा जाता है। ये ऐसे विमान होते हैं जिन्हें बिना किसी इंसानी पायलट के रिमोट कंट्रोल या ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के जरिए उड़ाया जाता है। इनका इस्तेमाल फोटोग्राफी, सामान की डिलीवरी से लेकर मिलिट्री सर्विलांस और सटीक हमलों तक में किया जाता है।
ट्रम्प ने ड्रोन इम्पोर्ट पर 100% तक टैरिफ लगाया:चीन पर निर्भरता घटाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया; UK-EU समेत 7 देशों पर शुल्क बढ़ा

