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ग्लास्गो कॉमनवेल्थ में हरियाणा की PHD स्कॉलर ने जीता ब्रॉन्ज:प्रेग्नेंसी के दौरान 2 सीजन ग्राउंड से बाहर रहीं, पति की कोचिंग में शानदार कमबैक

ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरियाणा की डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। गुरुवार देर रात स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में इस इवेंट में जमैका की सामंथा हॉल ने गोल्ड जबकि कनाडा की जूलिया टंक्स ने सिल्वर जीता। सीमा कालीरमन ने 58.65 मीटर का बेस्ट थ्रो करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में यह दूरी तय कर पोडियम पर जगह बनाई। सीमा के इस ब्रॉन्ज मेडल के साथ भारत के 17 मेडल हो गए हैं। इनमें 3 गोल्ड, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज शामिल हैं। भारत 10वें स्थान पर है। बता दें कि सीमा हरियाणा के दिनोद गांव की रहने वाली है। दो साल पहले प्रेगेनेंसी की वजह से सीमा को दो सीजन बाहर बैठना पड़ा था। मगर, बेटे रुद्र के जन्म के बाद सीमा ने पति की कोचिंग में शानदार कमबैक किया और कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। सीमा ने तीसरे प्रयास में पाई सफलता डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमन के सामने फाइनल में कड़ी चुनौती थी। फाइनल में उन्हें 6 थ्रो मिले, लेकिन इनमें से 4 थ्रो फाउल रहे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में सीमा ने 57.32 मीटर का थ्रो कर तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने 58.65 मीटर का शानदार थ्रो किया, जो आखिरी तक उनके लिए ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाला साबित हुआ। बाद के तीनों थ्रो फाउल रहे, लेकिन कोई भी खिलाड़ी उनके बेस्ट थ्रो को पीछे नहीं छोड़ सका। सीमा कालीरमन, भिवानी से कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने तक का सफर नेशनल इंटर स्टेट मीट में गोल्ड जीतकर पेश की थी दावेदारी सीमा की मेहनत रंग लाई और उन्होंने भुवनेश्वर में हाल ही में हुई नेशनल इंटर-स्टेट मीट में 59.73 मीटर का अपना अब तक का सबसे बेहतरीन थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीता। इस थ्रो के कारण उन्होंने देश की टॉप डिस्कस थ्रोअर में अपनी जगह मजबूत की। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2026 एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई किया और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई। इवेंट में जीत के बाद उन्होंने कहा था, ‘मैदान पर वापसी करना बहुत मुश्किल था क्योंकि मैं ठीक से डिस्कस भी नहीं फेंक पा रही थी। मगर, मुझे लगता है कि मेरे पति से मिले मोटिवेशन और उनकी मेंटरिंग ने मुझे अपनी सामान्य ताकत वापस पाने और फिर उसमें और सुधार करने में मदद की।’ इससे पहले 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रहीं सीमा ने 2025 साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था।

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