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एअर इंडिया दुनिया की चौथी ऑन-टाइम एयरलाइन बनी:जून में 86.85% फ्लाइट्स टाइम पर पहुंचीं; सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा

टाटा ग्रुप की एअर इंडिया दुनिया की चौथी सबसे पंक्चुअल (समय की पाबंद) एयरलाइंस बन गई है। एविएशन एनालिटिक्स फर्म सिरियम की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एअर इंडिया की लगभग 86.85% फ्लाइट्स यानी 100 में से 87 उड़ानें बिल्कुल तय समय पर पहुंची हैं। टाटा ग्रुप की स्वामित्व वाली एयरलाइन ने जून महीने में अपनी कुल 15,135 उड़ानें ऑपरेट कीं। एअर इंडिया ने सिंगापुर एयरलाइंस और एमिरेट्स को पीछे छोड़ा है। एविएशन के नियमों के मुताबिक, कोई फ्लाइट अपने तय समय से 15 मिनिट में उड़ान भर लेती है, तो उसे राइट टाइम माना जाता है। साउदिया पहले और कोरियन एयर दूसरे नंबर पर रही सिरियम के अनुसार, ग्लोबल रैंकिंग में एअर इंडिया से आगे सिर्फ तीन एयरलाइंस रहीं। इसमें साउदिया 92.38% के साथ पहले, कोरियन एयर 88.56% के साथ दूसरे और एयरोमेक्सिको 86.94% के साथ तीसरे स्थान पर रही। एअर इंडिया (86.85%) के बाद टॉप-10 की लिस्ट में सिंगापुर एयरलाइंस, वेस्टजेट, एमिरेट्स, टर्किश एयरलाइंस, SAS और कतर एयरवेज शामिल हैं।
कंप्लीशन फैक्टर 99.7% रहा, लगभग सभी उड़ानें ऑपरेट हुईं एअर इंडिया ने जून के महीने में 86.23% का ऑन-टाइम डिपार्चर (समय पर प्रस्थान) रेट भी हासिल किया है। इसके साथ ही एयरलाइन का कंप्लीशन फैक्टर 99.7% रहा, जिसका मतलब है कि जून में कंपनी की लगभग सभी तय उड़ानों को बिना रद्द किए ऑपरेट किया। एशिया-पैसिफिक रीजन की रैंकिंग की बात करें तो एयर इंडिया चौथे स्थान पर रही। इस रीजन में वह जेजू एयर, कोरियन एयर और स्कूट से पीछे रही, लेकिन सिंगापुर एयरलाइंस और भारत की ही इंडिगो से आगे निकल गई। नेटवर्क प्लानिंग और ऑपरेशनल रेजिलिएंस में निवेश से मिला फायदा एअर इंडिया ने कहा कि यह रैंकिंग एयरलाइन द्वारा ऑपरेशनल रिलायबिलिटी और शेड्यूल इंटीग्रिटी पर लगातार दिए जा रहे ध्यान को दर्शाती है। कंपनी ने इस सुधार का श्रेय ऑपरेशनल रेजिलिएंस, बेहतर नेटवर्क प्लानिंग और अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालनों में बेहतर एग्जीक्यूशन के लिए किए गए निवेश को दिया है। एयरलाइन अपने ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम के तहत लगातार इस परफॉर्मेंस को सुधारने में जुटी है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर कंजेशन से होती है दिक्कत देश के सबसे बड़े हब-एंड-स्पोक नेटवर्क्स में से एक को ऑपरेट करने की चुनौतियों पर एयर इंडिया ने बताया कि दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर भारी कंजेशन (भीड़भाड़) और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के प्रतिबंधों के कारण अक्सर परिचालन प्रभावित होता है। इन दो प्रमुख हब्स पर होने वाली देरी का असर बाद में पूरे नेटवर्क पर पड़ता है। DGCA के मई के आंकड़ों में एअर इंडिया तीसरे स्थान पर थी भारत के विमानन नियामक महानिदेशालय (DGCA) भी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) को ट्रैक करता है, लेकिन उसके पास फिलहाल मई महीने का ही डेटा अवेलेबल है। DGCA देश के 10 प्रमुख एयरपोर्ट्स (बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, कोच्चि, गुवाहाटी और लखनऊ) पर घरेलू एयरलाइंस की समय पाबंदी को मापता है। मई में एयर इंडिया ग्रुप का ओटीपी 74.5% था और वह इंडिगो व अकासा एयर के बाद तीसरे नंबर पर था। मई के दौरान एयर इंडिया का सबसे अच्छा रिकॉर्ड चेन्नई में (89.5% उड़ानें समय पर) और सबसे खराब प्रदर्शन लखनऊ में (केवल 62.4% उड़ानें समय पर) रहा था। बेड़े में शामिल हुए 3 नए बोइंग विमान एअर इंडिया ने बताया कि उसने पिछले 6 महीनों के दौरान अपने बेड़े में तीन बोइंग 787-9 विमान शामिल किए हैं, जबकि कुछ और बोइंग 787-9 और एयरबस A350-1000 विमान इस साल के अंत तक बेड़े में शामिल होने वाले हैं। इसके अलावा, नए और रिफर्बिश्ड (नए जैसे किए गए) इंटीरियर वाले दो पुराने बोइंग 787-8 विमान वापस सेवा में लौट आए हैं, जबकि तीन अन्य विमानों का अमेरिका में अपग्रेडेशन चल रहा है। कंपनी का अनुमान है कि साल 2026 के अंत तक एयर इंडिया के वाइडबॉडी विमानों के 50% से अधिक बेड़े में नया या अपग्रेड किया गया इंटीरियर होगा। ——————– ये खबर भी पढ़ें… एअर इंडिया ने इंटरनेशनल उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज घटाया: नॉर्थ अमेरिका और यूरोप के टिकट ₹7,617 तक सस्ते होंगे; घरेलू उड़ानों में बदलाव नहीं टाटा ग्रुप की विमानन कंपनी एअर इंडिया ने नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और UK जाने वाली अपनी उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज कम करने का एलान किया है। PTI के सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल के दामों में आई कमी के बाद एयरलाइन ने यह कदम उठाया है, जिससे इन रूटों पर अंतरराष्ट्रीय हवाई सफर करने वाले यात्रियों की जेब का बोझ कम होगा। नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। हालांकि घरेलू उड़ानों पर कोई बदलाव नहीं किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

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