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आपका पैसा- ‘फाइनेंशियल मिनिमलिज्म’ का ट्रेंड:कम सामान, आसान जीवन, समझें इसके फायदे, जानें फालतू खर्चों को कैसे कंट्रोल करें

महीने की शुरुआत में सैलरी खाते में आते ही लगता है कि इस बार जरूर बचत होगी। लेकिन महीने के आखिर तक अकाउंट फिर खाली होता है। समझ ही नहीं आता कि पैसा आखिर कहां खर्च हो जाता है। कई बार आर्थिक परेशानियों की वजह कोई बड़ी खरीदारी नहीं, बल्कि रोज के अनियोजित खर्च होते हैं। सभी गैरजरूरी खर्चों को कंट्रोल करने को ‘फाइनेंशियल मिनिमलिज्म’ कहते हैं। इसमें बचत और निवेश को प्राथमिकता दी जाती है। इन्हीं गैरजरूरी खर्चों पर लगाम लगाने की सोच को ‘फाइनेंशियल मिनिमलिज्म’ कहते हैं। इसका मतलब कंजूसी करना नहीं, बल्कि हर रुपए को सोच-समझकर खर्च करना और बचत व निवेश को प्राथमिकता देना है। जापान का 100 साल से भी पुराना बजटिंग तरीका ‘ककीबो’ (Kakeibo) भी इसी सिद्धांत पर आधारित है। इसमें हर खर्च को लिखने और समय-समय पर उसकी समीक्षा करने की सलाह दी जाती है, ताकि पता चल सके कि कौन-सा खर्च वास्तव में जरूरी था और कौन-सा नहीं। आज ‘आपका पैसा’ में फाइनेंशियल मिनिमलिज्म की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद सवाल- फाइनेंशियल मिनिमलिज्म क्या है? जवाब- यह पैसे को मैनेज करने का एक तरीका है। इसमें व्यक्ति गैरजरूरी खर्च नहीं करता है। रकम को बचत या निवेश में लगाता है। उदाहरण के लिए- सवाल- क्या फाइनेंशियल मिनिमलिज्म का मतलब सिर्फ कम खर्च करना है? जवाब- नहीं, इसका मतलब सही जगह और सही चीजों पर खर्च करना है, जैसेकि- सवाल- फाइनेंशियल मिनिमलिज्म और कंजूसी में क्या फर्क है? जवाब- फाइनेंशियल मिनिमलिज्म समझदारी से खर्च करना है, जबकि कंजूसी जरूरी खर्च से भी बचना है। ग्राफिक में दोनों का फर्क देखिए- सवाल- मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल आज दुनिया भर में पॉपुलर क्यों हो रही है? जवाब- लोग अब सिर्फ ज्यादा कमाने की बजाय पैसों का समझदारी से इस्तेमाल करने और आर्थिक सुकून पाने पर भी ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि फाइनेंशियल मिनिमलिज्म तेजी से पॉपुलर हो रहा है। इसके पीछे कई वजहें हैं- सवाल- हम जरूरत से ज्यादा सामान क्यों खरीद लेते हैं? जवाब- इसकी कई वजहें होती हैं- सवाल- ऑनलाइन शॉपिंग एप्स हमारी खरीदारी की आदतों को कैसे प्रभावित करते हैं? जवाब- ऑनलाइन शॉपिंग एप्स ऐसी डिजिटल स्ट्रैटजी अपनाते हैं, जो लोगों को ज्यादा और जल्दी खरीदारी करने के लिए प्रेरित करती हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन सर्च और खरीदारी के आधार पर पसंद की चीजें बार-बार दिखाते हैं। फ्लैश सेल का दबाव कम समय का ऑफर देकर तुरंत खरीदने का साइकोलॉजिकल प्रेशर बनाते हैं। लगातार ऑफर और नोटिफिकेशन लगातार डिस्काउंट और डील्स के मैसेज खरीदारी की इच्छा बढ़ाते हैं। आसान और तेज पेमेंट इससे खरीदारी में लगने वाला समय और सोचने का मौका कम हो जाता है। सवाल- सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स हमारी खर्च करने की आदतों को कैसे बदल रहे हैं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या इमोशनल स्ट्रेस भी फिजूलखर्च की वजह है? जवाब- हां, कुछ लोग तनाव, उदासी या चिंता में ज्यादा खरीदारी करते हैं। इससे कुछ समय के लिए अच्छा महसूस होता है। इसे ‘इमोशनल स्पेंडिंग’ या ‘रिटेल थेरेपी’ कहा जाता है। अगर यह आदत लगातार बनी रहे, तो बजट और बचत दोनों प्रभावित होते हैं। सवाल- कौन-से संकेत बताते हैं कि आपके जीवन में फाइनेंशियल क्लटर (आर्थिक अव्यवस्था) है? जवाब- अगर पैसे होने के बावजूद बचत नहीं हो रही, तो यह फाइनेंशियल क्लटर का संकेत हो सकता है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- फाइनेंशियल मिनिमलिज्म कैसे शुरू करें? जवाब- सभी आसान तरीके ग्राफिक में देखिए- अब इन पॉइंट्स को थोड़ा विस्तार से समझिए- 1. खर्चों का ऑडिट करें 2. जरूरत और इच्छा में फर्क समझें खरीदने से पहले खुद से ये सवाल पूछें- 3. ‘24-घंटे या 30-दिन का रूल’ अपनाएं 4. घर का फाइनेंशियल डिक्लटर करें 5. सब्सक्रिप्शन की समीक्षा करें 6. EMI और कर्ज कम करें 7. बचत को ऑटोमैटिक बनाएं 8. खरीदारी की लिमिट तय करें 9. कम, लेकिन अच्छी क्वालिटी खरीदें 10. बचाए हुए पैसों का निवेश करें सवाल- ‘24-ऑवर रूल’ और ‘30-डे रूल’ क्या है, डिटेल में समझाएं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- 24-ऑवर रूल 30-डे रूल सवाल- कपड़ों पर खर्च कैसे कम करें? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या महंगे गैजेट्स सच में जरूरी हैं? इस खर्च को कैसे कम करें? जवाब- नहीं, अगर मौजूदा डिवाइस आपकी जरूरत पूरी कर रही है, तो सिर्फ नया मॉडल आने या ट्रेंड के कारण उसे बदलने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा- सवाल- छोटे-छोटे खर्च कम करने से लंबी अवधि में कितना बड़ा फंड बन सकता है? जवाब- अगर आप रोज सिर्फ ₹100 बचाकर नियमित निवेश करते हैं, तो यही छोटी बचत 10-20 साल में लाखों रुपए का फंड बन सकती है। ग्राफिक में रोज ₹100 बचाने की ताकत देखिए- सवाल- 20-30 साल के युवाओं के लिए मिनिमलिज्म क्यों जरूरी है? जवाब- इस उम्र में फाइनेंशियल मिनिमलिज्म अपनाने से भविष्य के लिए मजबूत फाइनेंशियल बेस तैयार होता है। इससे- सवाल- शुरुआती नौकरी में कौन-सी वित्तीय आदतें अपनानी चाहिए? जवाब- इस दौरान अपनाई गई आदतें भविष्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती हैं। ऐसे में- ……………………… ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- 35 की उम्र में 1 करोड़ का फंड:समझें कंपाउंडिंग का गणित और SIP के फायदे, फाइनेंस एक्सपर्ट की 10 जरूरी सलाह हर कोई चाहता है कि 35-40 की उम्र तक उसके पास इतना पैसा हो कि घर खरीदने, कोई बिजनेस शुरू करने या बच्चों की पढ़ाई जैसे सपने पूरे करने के लिए पैसों की चिंता न करनी पड़े। अच्छी बात यह है कि 1 करोड़ का फंड बनाने के लिए बहुत बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

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